मार्केटिंग की असली कमी विचारों की नहीं, सोमवार के इरादे को शुक्रवार तक प्रकाशित काम में बदलने वाली व्यवस्था की होती है। दो X पोस्ट और खाली ब्लॉग टैब बताते हैं कि लिखना अभी भी आपके बचे हुए समय पर निर्भर है।
अप्रैल 1970 में अपोलो 13 के भीतर कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ रही थी। विस्फोट के बाद चंद्रमा पर उतरने का अभियान बचाव अभियान बन चुका था। अंतरिक्ष यात्रियों के पास कमांड मॉड्यूल के चौकोर कार्बन डाइऑक्साइड फ़िल्टर थे, जबकि लूनर मॉड्यूल में गोल फ़िल्टर लगते थे। उपलब्ध पुर्जे आपस में फिट नहीं होते थे और समाधान की सफलता पहले से तय नहीं थी।
ह्यूस्टन के मिशन कंट्रोल में एड स्माइली के नेतृत्व वाली टीम ने अंतरिक्ष यान में उपलब्ध सामान से एक अडैप्टर बनाने की प्रक्रिया तैयार की। चालक दल ने उन्हीं निर्देशों के आधार पर उपकरण बनाया और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर घटाया। NASA के अपोलो 13 विवरण में यह घटना दर्ज है।
आपके सोमवार की समस्या के दांव इतने बड़े नहीं हैं, पर उसकी बनावट पहचानी हुई है। सामग्री मौजूद है: रिलीज़ नोट्स, ग्राहक के सवाल, डेमो रिकॉर्डिंग, उत्पाद के स्क्रीनशॉट और पिछले सप्ताह का सीखा हुआ सबक। कमी उस अडैप्टर की है जो इन बिखरे हिस्सों को शुक्रवार तक ब्लॉग, पोस्ट और वीडियो में बदल सके।
सोमवार का इरादा शुक्रवार तक क्यों नहीं पहुँचता
तकनीकी संस्थापक आम तौर पर लिखने से नहीं डरते। वे दस्तावेज़ लिखते हैं, पुल रिक्वेस्ट समझाते हैं और ग्राहक को बग का कारण बताते हैं। रुकावट तब आती है जब उसी जानकारी को सही पाठक, सही कोण और सही चैनल के अनुसार ढालना पड़ता है।
सोमवार को ब्लॉग टैब खुलता है। फिर किसी ग्राहक का संदेश आता है। बिल्ड टूटती है। डेमो के पहले एक किनारे वाला मामला सामने आता है। दो छोटे X पोस्ट इसलिए निकल जाते हैं क्योंकि उनमें शोध, संरचना, चित्र, आंतरिक लिंक और संपादन का भार कम है। लंबा लेख शुक्रवार तक टैब में ही रहता है।
हर सप्ताह यही क्रम दोहरने पर नुकसान केवल एक अधूरा लेख नहीं होता। खोज के लिए उपयोगी पन्ने नहीं बनते, नए पाठक उत्पाद की उपयोगिता नहीं समझते और अगली घोषणा फिर शून्य से शुरू होती है। तीन महीने बाद संस्थापक के पास कई छोटे अपडेट होते हैं, पर ऐसा सामग्री संग्रह नहीं होता जो बिक्री कॉल, खोज परिणाम और नए उपयोगकर्ता की जाँच में काम आए।
सामग्री को प्रेरणा नहीं, अडैप्टर चाहिए
अपोलो 13 की टीम को नया अंतरिक्ष यान बनाने का समय नहीं मिला। उसे उपलब्ध चीज़ों के बीच भरोसेमंद जोड़ बनाना पड़ा। संस्थापक की सामग्री व्यवस्था को भी यही करना चाहिए।
पहला जोड़ उत्पाद रणनीति है। हर मसौदे को तय लक्ष्य बाज़ार, आदर्श ग्राहक, पोज़िशनिंग, ब्रांड आवाज़, प्रतिस्पर्धियों और कीवर्ड से निकलना चाहिए। इससे सोमवार को “आज क्या लिखूँ?” वाला सवाल छोटा हो जाता है।
दूसरा जोड़ उत्पादन क्रम है। एक उत्पाद बदलाव से ब्लॉग का विषय, X पोस्ट, LinkedIn मसौदा, न्यूज़लेटर का हिस्सा और वीडियो की रूपरेखा बन सकती है। [एक उत्पाद अपडेट से पाँच मसौदे बनाने की यह मिसाल](/blog/hi/कंटेंट-मार्केटिंग-एक-उत्पाद-अपडेट-से-सारा-ने-पाँच-मसौदे-कैसे-बनाए-82c43acc/) इसी काम को व्यावहारिक रूप में दिखाती है।
तीसरा जोड़ प्रकाशन नियम हैं। कौन सा चैनल जुड़ा है, कहाँ समीक्षा आवश्यक है, कहाँ स्वीकृत सामग्री तय समय पर प्रकाशित हो सकती है और किस प्रदाता की सीमा लागू है, यह पहले तय होना चाहिए। वरना तैयार मसौदे भी किसी फ़ोल्डर में पड़े रहते हैं।
Marketing Agent इसी जोड़ को प्रति उत्पाद बनाता है। वह रणनीति तय करने, रुझानों से प्रमाण सहित कोण निकालने, संपादकीय कैलेंडर रखने, स्थानीयकृत लेख और सामाजिक पोस्ट बनाने, वीडियो तैयार करने और समर्थित जुड़े चैनलों पर स्वीकृत या अनुमति प्राप्त सामग्री प्रकाशित करने में मदद करता है। नियंत्रण उत्पाद के दायरे, अनुमतियों, बजट, दैनिक सीमाओं और मंज़ूरी के नियमों के भीतर रहता है।
सप्ताह की न्यूनतम प्रकाशित इकाई तय करें
“इस सप्ताह मार्केटिंग करनी है” काम की परिभाषा नहीं है। इसके बदले एक न्यूनतम प्रकाशित इकाई तय करें: एक ठोस उत्पाद विषय, एक उपयोगी लेख और उसी स्रोत से बने चैनल के अनुकूल छोटे मसौदे।
सप्ताह शुरू होने से पहले स्रोत चुनें। वह नई सुविधा, ग्राहक का बार बार आने वाला सवाल, प्रतिस्पर्धी का बदलाव या खोज में दिख रही समस्या हो सकती है। फिर उसके लिए एक पाठक और एक अपेक्षित अगला कदम तय करें। मसौदा बनने के बाद दावे जाँचें, स्क्रीनशॉट स्वीकृत करें और प्रकाशन समय तय करें।
यदि पूरा काम संस्थापक के हाथ में रहेगा, तो बिल्ड की हर आपात स्थिति उसे पीछे धकेलेगी। बेहतर सीमा यह है कि संस्थापक दिशा, दावे और अंतिम मंज़ूरी सँभाले; दोहराए जाने वाले शोध, रूपांतरण, कैलेंडर और वितरण को व्यवस्था सँभाले। [निर्णय अपने पास रखकर क्रियान्वयन सौंपने का यह तरीका](/blog/hi/अकेले-संस्थापक-की-मार्केटिंग-लियो-ने-निर्णय-बचाकर-क्रियान्वयन-सौंपा-49a45b9a/) इस सीमा को साफ करता है।
शुक्रवार को टैब नहीं, प्रकाशित काम गिनें
लेखन के घंटे कमजोर पैमाना हैं। खुले टैब तो और भी कमजोर हैं। सप्ताह के अंत में गिनें कि कितने उपयोगी पन्ने प्रकाशित हुए, कितने चैनल मसौदे स्वीकृत हुए, क्या छूट गया और किस सामग्री ने प्रतिक्रिया या ट्रैफ़िक पाया।
फिर वही प्रदर्शन अगला विषय चुनने में लगाएँ। जो सवाल बार बार प्रतिक्रिया लाता है, उससे विस्तृत लेख बनाइए। जिस लेख पर पाठक नहीं टिकते, उसका खोज आशय और शुरुआती उत्तर जाँचिए। जिस चैनल पर प्रदाता पहुँच उपलब्ध नहीं है, उसे अधूरा छोड़ने के बजाय समर्थित गंतव्य के लिए दोबारा नियोजित कीजिए।
अपोलो 13 का समाधान किसी एक शानदार सामग्री से नहीं बना था। उसकी ताकत उपलब्ध हिस्सों को एक स्पष्ट प्रक्रिया से जोड़ने में थी। सोमवार और शुक्रवार के बीच की आपकी दूरी भी उसी तरह घटती है: उत्पाद में पहले से मौजूद ज्ञान को ऐसी व्यवस्था से जोड़कर, जो उसे नियमित रूप से तैयार, जाँचा और प्रकाशित काम बनाती रहे।
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